अनूपपुर - जब सब कुछ आपके हाथ में था, तब कुछ किये नही, आजकल लेटर - लेटर की राजनीति का प्रचलन बढ़ गया है। अरे भाई साहब पहले आप यह तय कर लो कि अस्पताल की दुर्दशा पर आप जो लिख रहे हो वह सही है या सरकार जिन कर्मठ भद्र जनों की नियुक्ति की हैl
रुग्ण अस्पताल को पुरस्कार दी है वह सही है?
आप की बात समस्याओं को चिन्हित कर रही है l
प्रभारी मंत्री का कार्य क्षमता पर प्रश्न चिन्ह है?
समस्याओं के निदान लिए आपका निवेदन सही है या
सरकार व प्रशासन का सुशासन पर प्रतिवेदन सही है?
अब आप ही सोचिये यहाँ के लोगों की रोजी रोटी की समस्या का एक ही झटके में समाधान हो गया। अब यहाँ के बेरोजगारों को दूसरे राज्यों में मजूरी करने के जाने के लिए बड़ी बड़ी सुपर फास्ट गाड़ियां रुकने लगी है l
मैं तो विकास के इस पैमाने से बहुत खुश हूँ, आप अपने सरकार व उसके कार्य से काहे खुश नही हैं, साहेब!
समझ में नही आ रहा है कि -"नारी बीच साड़ी है की साड़ी बीच नारी है नारी है की साड़ी है साड़ी है की नारी है।
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